Articles discussing पुष्पदंत
रायकुमारचरिउ एक आद्यन्त जैन-काव्य
डॉ. गजानन नरसिंह साठे · Jain Vidya, 1985
“'पुष्पदंत कीं कृतियों से यह निविवाद स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने संस्कृत भाषा श्रौर साहित्य का, छत्द:शास्त्र और केव्यिशास्त्र का श्रध्ययन किया था । जैनदंशेन के साथ ही वें ग्रन्य ર્તી से भी सम्यक परिचिंत”
पुष्पदंत की भाषा
डॉ. कैलाशचन्द्र भाटिया · Jain Vidya, 1985
“इस दृष्टि से प्रप्र श-घारा में पुष्पदंत का स्थान भ्रद्वितीय है ।”
रायक्मारचरिउ में प्रतिपादित जीवनमूल्य
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1985
पुष्पदंत और सुरदास (वात्सल्य)
डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1985
यशोधर का श्राख्यान गुरुकुल में व्याख्यान
नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1985
जसहरचरिउ का काव्य-वैभव
पुष्पदंत, परशुराम लक्ष्मण वैद्य, डॉ. हीरालाल जैन · Jain Vidya, 1985
“महाकवि पुष्फयंत (पुष्पदंत) की तीन रचना महापुराण, रायक्रुमारचरिड तथा जसहरचरिउ प्राप्त § । इनका समय ईस्वी सन् की दसवीं शताब्दी है”
आरम्भिक
Jain Vidya, 1985
“महाकवि स्वयंभू के पश्चात् जिस महाकवि का नाम શ્રવખ્ર શ साहित्य के ज्ञात रचनाकारों की सूची મે ત્રાતા है वे हैं महाकवि पुष्पदंत।”
जसहरचरिउ में श्रात्मा सम्बन्धी विचार
धीर्यांशकुमार सिघई · Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदंत का काव्यप्रतिभा
Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदंत के आदिपुराण की एक सचित्र पाण्डुलिपि
राँ कस्तू रचन्द कासलीवाल · Jain Vidya, 1985
महापुराण के रामायण खण्ड की बिम्ब-योजना
Jain Vidya, 1985
युक्त्यनुशासनालंकार में प्रतिपादित नय
जम्बूसामिचरिउ की कथानकसूष्टि और हिन्दी काव्य-परम्परा
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1987
रायकुमारचरिउ की सूक्तियाँ और उनका अध्ययन
डां० कंस्तुरचद “सुमन · Jain Vidya, 1985
जैनविद्या संस्थान, श्रीमहावीरजी
Jain Vidya, 1985
जसहरचरिउ केर सुहासिय-वयरााइं
पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1985
गणितीय जिनागम गंगा के भागीरथ : आचार्य शिरोमणि श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती
प्रोफेसर लक्ष्मीचन्द्र जैन, प्रोफेसर डॉ. पदावतम्मा · Jain Vidya, 1997