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पुष्पदंत

18 articles in the archive discuss पुष्पदंत, from Jain Vidya, Jnana Desana (1985–2010). Open any article for its summary, citation and original PDF.

18 articles

Articles discussing पुष्पदंत

  1. रायकुमारचरिउ एक आद्यन्त जैन-काव्य

    डॉ. गजानन नरसिंह साठे · Jain Vidya, 1985

    “'पुष्पदंत कीं कृतियों से यह निविवाद स्पष्ट हो जाता है कि उन्होंने संस्कृत भाषा श्रौर साहित्य का, छत्द:शास्त्र और केव्यिशास्त्र का श्रध्ययन किया था । जैनदंशेन के साथ ही वें ग्रन्य ર્તી से भी सम्यक परिचिंत”
  2. पुष्पदंत की भाषा

    डॉ. कैलाशचन्द्र भाटिया · Jain Vidya, 1985

    “इस दृष्टि से प्रप्र श-घारा में पुष्पदंत का स्थान भ्रद्वितीय है ।”
  3. रायक्मारचरिउ में प्रतिपादित जीवनमूल्य

    डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1985

  4. पुष्पदंत और सुरदास (वात्सल्य)

    डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1985

  5. यशोधर का श्राख्यान गुरुकुल में व्याख्यान

    नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1985

  6. जसहरचरिउ का काव्य-वैभव

    पुष्पदंत, परशुराम लक्ष्मण वैद्य, डॉ. हीरालाल जैन · Jain Vidya, 1985

    “महाकवि पुष्फयंत (पुष्पदंत) की तीन रचना महापुराण, रायक्रुमारचरिड तथा जसहरचरिउ प्राप्त § । इनका समय ईस्वी सन् की दसवीं शताब्दी है”
  7. आरम्भिक

    Jain Vidya, 1985

    “महाकवि स्वयंभू के पश्चात् जिस महाकवि का नाम શ્રવખ્ર શ साहित्य के ज्ञात रचनाकारों की सूची મે ત્રાતા है वे हैं महाकवि पुष्पदंत।”
  8. जसहरचरिउ में श्रात्मा सम्बन्धी विचार

    धीर्यांशकुमार सिघई · Jain Vidya, 1985

  9. महाकवि पुष्पदंत का काव्यप्रतिभा

    Jain Vidya, 1985

  10. महाकवि पुष्पदंत के आदिपुराण की एक सचित्र पाण्डुलिपि

    राँ कस्तू रचन्द कासलीवाल · Jain Vidya, 1985

  11. महापुराण के रामायण खण्ड की बिम्ब-योजना

    Jain Vidya, 1985

  12. युक्त्यनुशासनालंकार में प्रतिपादित नय

    Sangeeta Mehta, Br. Anil Jain Shastri · Jnana Desana, 2010

  13. जम्बूसामिचरिउ की कथानकसूष्टि और हिन्दी काव्य-परम्परा

    डां. (श्रीमती) पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1987

  14. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1987

  15. रायकुमारचरिउ की सूक्तियाँ और उनका अध्ययन

    डां० कंस्तुरचद “सुमन · Jain Vidya, 1985

  16. जैनविद्या संस्थान, श्रीमहावीरजी

    Jain Vidya, 1985

  17. जसहरचरिउ केर सुहासिय-वयरााइं

    पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1985

  18. गणितीय जिनागम गंगा के भागीरथ : आचार्य शिरोमणि श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती

    प्रोफेसर लक्ष्मीचन्द्र जैन, प्रोफेसर डॉ. पदावतम्मा · Jain Vidya, 1997