Articles discussing नागकुमार
रायक्मारचरिउ में प्रतिपादित जीवनमूल्य
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1985
“नागकुमार ने ऐसा ही किया । हम तीन प्रसंगों में इसकी चर्चा करेंगे । (શ્ર) पिता की श्राज्ञा पाकर तागकुमार स्वदेश छोड़कर मथुरा की श्रोर चला गया”
रायकुमारचरिउ एक आद्यन्त जैन-काव्य
डॉ. गजानन नरसिंह साठे · Jain Vidya, 1985
पुष्पदंत और सुरदास (वात्सल्य)
डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदन्त : व्यक्तित्व और कर्तृत्व
डां०° आदित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1985
महाकवि पुष्पदंत की विचारदृष्टि एवं उपमानसृष्टि
डं० श्रीमती पुष्पलता जैन · Jain Vidya, 1985