Articles discussing भूतबलि
युक्त्यनुशासनालंकार में प्रतिपादित नय
सम्पादकीय
पंचस्तूपान्वयी भट्टारक श्री वीरसेन स्वामी
श्री कुन्दनलाल जैन · Jain Vidya, 1993
“इस तरह पंचस्तूपान्वयी भट्रारक आचार्य वीरसेन स्वामी की आचार्य पुष्पदन्त और भूतबलिकृत ' षद्खण्डागम' पर "धवला टीका" जो अपने आप में एक स्वतन्त्र, मौलिक ग्रन्यस्वरूप है, जैन वाङ्मय की દી नहीं अपितु भारतीय वाङ्मय की एक अनूठी और अद्भुत मौलिक कृति है”
भट्टारक वीरसेन और उनका समय
श्री रमाकान्त जैन · Jain Vidya, 1993
गणितीय जिनागम गंगा के भागीरथ : आचार्य शिरोमणि श्री नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती
प्रोफेसर लक्ष्मीचन्द्र जैन, प्रोफेसर डॉ. पदावतम्मा · Jain Vidya, 1997