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करकण्डचरिउ

5 articles in the archive discuss करकण्डचरिउ, from Jain Vidya (1987–1988). Open any article for its summary, citation and original PDF.

5 articles

Articles discussing करकण्डचरिउ

  1. मुनि कनकामर : व्यक्तित्व और कृतित्व

    मुनि कनकामर, (श्रीमती) अलका प्रचण्डिया 'दीति' · Jain Vidya, 1988

  2. करकण्डचरिउ की अध्यात्म-चेतना

    सुयेनारायण द्विवेदी · Jain Vidya, 1988

    “करकण्डचरिउ इसी तरह का एक आध्यात्मिक काव्य है जिसकी प्रकृति वर्णनप्रधान किन्तु जिसका प्रतिपाद्य पंचकल्याण ग्रौर दूसरे इसी प्रकार के व्रतो, उपवासों श्रौर तपस्याश्मों के भ्राघार पर मानवीय चेतना के शुद्धिकरण की महत्ता से सम्बद्ध है ।”
  3. प्रारस्मिक

    प्रवीरचन््र जैन · Jain Vidya, 1988

    “करकण्डचरिउ के माध्यम से उन्होने धमं श्रौर दर्शन की विशेषताओं को लोगों तक पहुंचाया, वे समत्व के साधक थे, सत्य के उपासक थे”
  4. प्रारम्भिक

    प्रो. प्रवीणचन्द्र जैन · Jain Vidya, 1987

  5. करकंडचरिउ का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन

    एडॉ० महेन्द्रसागर प्रचंडिया · Jain Vidya, 1988