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भविसयत्त

3 articles in the archive discuss भविसयत्त, from Jain Vidya (1986–1986). Open any article for its summary, citation and original PDF.

3 articles

Articles discussing भविसयत्त

  1. भविसयत्तकहा का साहित्यिक महत्त्व

    Jain Vidya, 1986

  2. अपभ्रंश का शिखर महाकाव्य भविसयत्तकहा

    डॉ० शरीरंजन सूरिदेव, धनपाल · Jain Vidya, 1986

    “'भविसयत्तकहदा' की भाषा प्राचीन अपभ्रंश है । यही कारण है कि इसके शाब्दिक प्रयोगों में बहुरूपता શ્રૌર व्याकरण की शिथिलता परिलक्षित होती है”
  3. भेंट कवि धनपाल से

    नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1986