Articles discussing घनपाल
भेंट कवि धनपाल से
नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1986
“उत्तर--मेरा नाम संस्कृत में 'घनपाल' है लेकिन श्रपभ्रंश में 'घणपाल' या પવાર भी है”
अपभ्रंश का शिखर महाकाव्य भविसयत्तकहा
डॉ० शरीरंजन सूरिदेव, धनपाल · Jain Vidya, 1986
प्रारस्मिक
प्रवीरचन््र जैन · Jain Vidya, 1988