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प्रमाण-लक्षण-निरुपण में प्रमाणमीमांसा का अवदान

By Sagarmal Jain

Vol. 15December - 1989pp. 27–39Hindi

Summary

प रम ण लक षण न र पण 3 म ग रम णम म स क अवद न ત ર લ ન સત ર ज न न य य क ब क स न य य एव प रम ण चर च क क ष त र म स म न य र प स ગત द शन क 1 और વ શ વરવ स આજ ય द मचन द क सन थ प रम णम म स क कय अवद न ह यह ज नन क ल ए એન न य य क e क ज नन आवश यक ह यद यप ज न क पब चज ञ न क र द ध न त पयप त प र च न છ और એમ व द य क क छ ब द व न उस प श व क य ग तक ल ज त ह क न त जह तक ત રમ ળ વ ચ ર क A7 હ એન क પ રત न य र ध क म म सक ok ब द ध क पल त ह ह आ દ प रम ण चर च क प रस ग म जन क प रव श ઘ ર wadi છ क न त कस क रण ક इस શ ત म ज व श ष ट अवद न ર सक ह वह हम र ल ए ग रव क કહ ય ह इस AT म परवर त प रद श જ જ મ यह छ आ क તન न પણ ओर प रत पक ष क स द ध न त क ग ण द व क સત ર म ल य कन करक फ र अपन मस तव य क इस र प म પરહ क य क बह વણ और વગ क त र फ क क म य क पर स ज न करत ह ए एक व य पक ઓર स स स वय त मक વ જ ઞ ન बन सक ३० स खल लज क अन स र ज न श न म म स न म ख यत त न य ग म भपन क रम क व क स क प र ण क य ह ૧ आगमय ग ૨ अन क न त स थ पन य ग और ૩ न य यप रम ण स थ पन य ग यह हम इन य ग क व ड

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Conclusion

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Key passages

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  • ““हेमचन्द्र कहते & कि प्रजा में यदि व्यापक देशायेस और झूरवीरता हो, किन्तु यदि घार्मिक उदारता A हो તો देवा की जनता खतरे में ही -होगी यह निश्चित ही समझना चाहिए”

Works cited in this article

  1. अभयदेव का “वादाणेव”
  2. योगशास्त्र

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