Articles discussing गोम्मटसार
आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती और उनका साहित्य संसार
डॉ. आदित्य प्रचण्डिया 'दीप्ति' · Jain Vidya, 1997
“आचार्य नेमिचन्द्र તે धवल-सिद्धान्त का मंथन करके ' गोम्मटसार ' नामक ग्रन्थ का प्रणयन किया और जयधवल-सिद्धान्त का मंथन करके ' लब्धिसार ' ग्रन्थ की रचना”
गोम्मटसार के कर्ता
नेमिचन्द्र · Jain Vidya, 1997
“प्राकृत भाषा में क्रमशः 734 और 972 गाथाओं में ' जीवकाण्ड ' और ' कर्मकाण्ड ' नाम से दो खण्डों में निबद्ध सिद्धान्त ग्रन्थ *गोम्मटसार* नाम से सामान्यतया जाना जाता है ।”
सिद्धान्तचक्रवर्ती के 'गोम्मटसार' का कर्मकाण्ड : कर्मसिद्धान्त का प्रामाणिक सन्दर्भ
विद्यावाचस्पति डॉ. श्रीरंजनसूरिदेव, आचार्य नेमिचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती · Jain Vidya, 1997
“जैन साहित्येतिहास में 'गोम्मटसार' कौ जो आविर्भाव कथा अंकित है वह बड़ी रोचकं है ।”
सम्पादकीय
Jain Vidya, 1997
शिवार्यकृत भगवती आराधना में चित्रित “समाहित चित्त” का स्वरूप एवं उपयोग : सल्लेखना के परिप्रेक्ष्य में
डॉ. पी. सी. जैन · Jain Vidya, 2011
श्री वीरसेनाचार्य (आधुनिक न्यायशास्त्र के संदर्भ में )
प्रोफेसर एल.सी. जैन, कु. प्रभा जैन · Jain Vidya, 1993
पंचसंग्रह: कर्ममीमांसा का अपूर्व ग्रन्थ
आचार्य अमितगति, श्रमितगति · Jain Vidya, 1993
गोम्मटसार में कर्मबंध : कारण और निवारण