Articles discussing जयपुर
जयपुर नरेशों का संगीत प्रेम
Kamala Garg, Rajni Pandey · Sambodhi, 2010
“जयपुर साधारण नगरों की भांति मात्र भवनों, सड़कों, उद्यानों एवं मंदिरों का नगर नहीं है, जो अपने नागरिकों की मूलभूत आवश्यकताओं तथा सुविधाओं की पूर्ति करता हुआ इतिहास में बिना अपनी पहचान की छाप दिये अपनी काल यात्रा पूरी करता है।”
महाकवि पुष्पदंत की रचनाओं की राजस्थान में लोकप्रियता
पं ध्न्पकम्द न्यायतीयथ · Jain Vidya, 1985
गणितसार-हेमराज कृत एक कृत एक अप्रकाशित गणितीय पाण्डुलिपि
Anupam Jain, Goldi Tiwari · Jnana Desana, 2008
सम्पादकीय
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 2013
महाकवि पुष्पदंत के आदिपुराण की एक सचित्र पाण्डुलिपि
राँ कस्तू रचन्द कासलीवाल · Jain Vidya, 1985
“सचित्र प्रादिपुराण (जयपुर) की पाण्डुलिपि में 344 पत्र हैं लेकिन इनमें पत्र संख्या 10, 15, 102, 103, 132 व 133 नहीं होने से वर्तमान में इसमें 338 पत्र ही रह गये हैं।”
प्रकाशकीय
Jain Vidya, 1987
जैनधर्म के मर्मज्ञ : श्री वीरसेनाचार्य
श्री वीरसेनाचार्य, श्री कन्हैयालाल · Jain Vidya, 1993
परमसुख की साधनाः विपश्यना: कन्हैयालालजी लोढ़ा
Sagarmal Jain · Sambodhi, 2012