Articles discussing नागवसू
जंबसामिचरिउ के नारी-पात्र
Jain Vidya, 1987
“नागवसू उन्हें प्रणाम करती है। पहचान न पाने के कारण वे नागवसू से सही सारा वृत्तान्त पूछते”
जंबसामिचरिउ & वैराग्य-प्रसंग
Jain Vidya, 1987
“सभी धार्मिक साहित्य-स्जंकों (मुनियों-प्राचार्थों) ने नारी को श्रात्मशोधन के मार्ग मे सदैव एक बाधा ही माना है किन्तु वीर कवि ने नागवसू का यह एक प्रनुपम उदाहरण प्रस्तुत कर परम्परा से चले શ્રા रहे इस पूर्वाग्रह को भ्रसत्य एवं थोथा साबित किया है”
जम्बूस्वामीचरित विषयक जैनसाहित्य