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जोइन्दु

3 articles in the archive discuss जोइन्दु, from Jain Vidya (1988–1988). Open any article for its summary, citation and original PDF.

3 articles

Articles discussing जोइन्दु

  1. जोइन्दु और अमृताशीति

    जोइन्दु, डॉ. ए. एन. उपाध्ये, डॉ. हीरालाल जैन, डॉ. नेमिचंद्र जैन शस्त्री · Jain Vidya, 1988

  2. परमात्मप्रकाश एक विश्लेषण

    डॉ. गदाधर सिंह · Jain Vidya, 1988

    “जोइन्दु ने देह को बहुत महत्त्व दिया है । शास्त्राचायों ने देह को कमेंबत्थन का मुल मानकर इसके प्रति श्रच्छी धारणा नहीं रखी है किन्तु जोइन्दु सरहपाद जैसे क्रान्तिकारी सिद्धों की पंक्तिमें खड़े हैं जिन्होंने देह को ही તીર્થ माना”
  3. जोइन्दु की परमात्मा-विषयक धारणा

    श्री राजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1988

    “जोइन्दु 'परमात्मा' જો (ब्रह्म) कहते हैं । उनका ब्रह्म बार-बार जन्म-मरण સે मुक्त रथात् सांसारिक सुख-दु ख से पूर्णतया निदत्त अपने वास्तविक-विशुद्ध स्वरूप मेँ रमण करता हरा.”