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योगसार

6 articles in the archive discuss योगसार, from Jain Vidya, Jain Bharati (1988–2000). Open any article for its summary, citation and original PDF.

6 articles

Articles discussing योगसार

  1. जोइन्दु और अमृताशीति

    जोइन्दु, डॉ. ए. एन. उपाध्ये, डॉ. हीरालाल जैन, डॉ. नेमिचंद्र जैन शस्त्री · Jain Vidya, 1988

    “इनकी बहुश्रुत व सुनिर्णीत कृतियों--परमात्मप्रकाश (परमप्पयासु) व योगसार (जोगसारु) के શ્રાઘા₹ पर વે दोनों धारणाएं 1. ये छठी शताब्दी ईस्वी के हैं तथा 2. ये श्रपश्रंश भाषा के महाकवि हैं, सुनिश्चित की गयी हैं परन्तु उनकी મુખે प्रामाणिकरूप से प्राप्त श्रन्य दो कृतियों ने इन, दोनों धारणाश्रों पर प्रश्नचिह्न अ्रंकित कर दिया है !”
  2. कविमनीषी योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन

    Jain Vidya, 1988

    “इस प्रकार परमात्मप्रकाश श्रौर योगसार नामक प्रंथों पर ત્રાઘારિત कविवर योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन संक्षेप में जाना जा सकता है”
  3. प्रास्ताविक

    Jain Vidya, 1988

  4. योगसार का योग

    पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1988

  5. जोइन्दु की परमात्मा-विषयक धारणा

    श्री राजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1988

  6. श्रद्धा : जड़ों का अभिसिचन

    साध्वी मुदितयशा · Jain Bharati, 2000