Articles discussing योगसार
जोइन्दु और अमृताशीति
जोइन्दु, डॉ. ए. एन. उपाध्ये, डॉ. हीरालाल जैन, डॉ. नेमिचंद्र जैन शस्त्री · Jain Vidya, 1988
“इनकी बहुश्रुत व सुनिर्णीत कृतियों--परमात्मप्रकाश (परमप्पयासु) व योगसार (जोगसारु) के શ્રાઘા₹ पर વે दोनों धारणाएं 1. ये छठी शताब्दी ईस्वी के हैं तथा 2. ये श्रपश्रंश भाषा के महाकवि हैं, सुनिश्चित की गयी हैं परन्तु उनकी મુખે प्रामाणिकरूप से प्राप्त श्रन्य दो कृतियों ने इन, दोनों धारणाश्रों पर प्रश्नचिह्न अ्रंकित कर दिया है !”
कविमनीषी योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन
Jain Vidya, 1988
“इस प्रकार परमात्मप्रकाश श्रौर योगसार नामक प्रंथों पर ત્રાઘારિત कविवर योगीन्दु का काव्यशास्त्रीय मूल्यांकन संक्षेप में जाना जा सकता है”
प्रास्ताविक
Jain Vidya, 1988
योगसार का योग
पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1988
जोइन्दु की परमात्मा-विषयक धारणा
श्री राजीव प्रचंडिया · Jain Vidya, 1988
श्रद्धा : जड़ों का अभिसिचन
साध्वी मुदितयशा · Jain Bharati, 2000