Articles discussing जैन परंपरा
मंत्र-विचारणा
समणी मंगलप्रज्ञा · Jain Bharati, 2000
“जैन परंपरा के चौदह पूर्वो म एक विद्यानुप्रवाद नाम का पूर्व થા| उसमें मंत्र-विद्या का सांगोपांग वर्णन થા | काल प्रवाह में वह ज्ञानराशि विलुप्त हो गई किंतु उसके अवशेष के रूप में आज भी जैन परंपरा मैं मंत्र-विद्या का अस्तित्व है तथा मंत्रों के विशिष्ट प्रकार के प्रयोग उपलब्ध हैं।”
विच्छिन्न परंपरा को पुनर्जीवन
साध्वी शुभ्रयशा · Jain Bharati, 2001
“जैन परंपरा में महावीर से महाप्रज्ञ तक की ध्यान परंपरा का सिहावलोकन करने पर ज्ञात होता है જિ इन दो महापुरुषों के मध्य काल में अनेक विलक्षण, तेजस्वी आचार्य हुए हैं, जिन्होंने ध्यान योग की वृष्टि से महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।”
भारतीय परपरा में सन्यास
साध्वी पीयूषप्रभा · Jain Bharati, 2001
धम्मो दीवों पड़ट्ठाण
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2001