Articles discussing जयाचार्य
दो कालजयी नक्षत्र
साध्वी मुदितयशा · Jain Bharati, 2001
अनुशासन के मंन्रदाता जयाचार्यं
आचार्यश्री महाप्रज्ञ · Jain Bharati, 2000
“जयाचार्य ने इस सचाई पर बहुत बल दिया कि जिसे अनुशासन की प्रतिष्ठा करनी हो, उसे स्वयं अनुशासित होना चाहिए। आदमी कहने से जितना नहीं सीखता उतना व्यवहार ओर आचरण से सीखता है।”
आतम रा कारज सारस्यां
Jain Bharati, 2001
स्वाध्याय: चेतना विकास का सूत्र
मुनि मदनकुमार · Jain Bharati, 2001