Articles discussing गीता
निम्बार्क के द्वैताद्वैत सिद्धान्त में कर्म की अवधारणा
Ramanath Pandey · Sambodhi, 2010
अहिसा मे है पच-महातव्रत
दयालचन्द्र सोनी · Jain Bharati, 2001
Uttaradhyayansutra mein Pratipadit Karma‑Mimansa
Kamal Kumar Jain · Sambodhi, 2004
“उत्तराध्ययन अर्धमागधी आगमसाहित्य में मूलसूत्र के नाम से प्रसिद्ध है । वैदिक परंपरा में जो स्थान गीता और बौद्ध परंपरा में जो स्थान धम्मपद का है, वही स्थान શ્રેતાંવર जैन परंपरा में उत्तराध्ययन का है”
कविमनीषी जोइन्दु का भ्राध्यात्मिक शिखरकाव्य परमात्मप्रकाश
डॉ. श्रोरंजन सुरिदेव, डॉ. हरिवंश कोछड़, डॉ. श्रादिनाथ नेमिनाथ उपाध्ये · Jain Vidya, 1988
Karm ka Bhotik Swarup
Mahaveer Raj Gelda · Sambodhi, 2003
Karmabandh aur Uske Karan
Shekhar Chandra Jain · Sambodhi, 2003
क्रियावाद बनाम कर्मवाद
Jain Bharati, 2001