Articles discussing सोमदेव
यशस्तिलक के सन्दर्भ में अहिंसा
Prof. Gokul Chandra Jain · Jnana Desana, 2011
“अहिंसा का फल बताते हुए सोमदेव कहते हैं कि अहिंसाव्रत के माहात्म्य से व्यक्ति आयुष्यमान्. सुभग, श्रीमान्. सुरूप तथा कीर्तिमान् होता है।”
यशोधर का श्राख्यान गुरुकुल में व्याख्यान
नेमीचंद पटोरिया · Jain Vidya, 1985
Vartamanakalin Sanskrit-Sahitya mein Rajakiya Kshetra ki Upadeyata
Manibhai E. Prajapati · Sambodhi, 2005
महाकवि पुष्पदन्त : व्यक्तित्व और कर्तृत्व
डां०° आदित्य प्रचण्डिया · Jain Vidya, 1985