Articles discussing न्याय
नैयायिक ज्ञान का साधन प्रत्यक्ष प्रमाण
Hemlata Srivastava · Sambodhi, 2006
“गौतम ने न्यायसूत्र में प्रत्यक्ष को परिभाषित करते हुए कहा है कि प्रत्यक्ष इन्द्रियार्थ-सन्निकर्षोत्पन्न ज्ञान है जो अव्यपदेश्य, अव्यभिचारी और व्यवसायात्मक होता है।”
पक्षीकरणम् : एक विश्लेषण
Jaipal Vidyalankar · Sambodhi, 2006