Articles discussing शंकराचार्य
ब्रह्मकारणतावाद एवं सृष्टि : एक आलोचना
Sureshwar Meher · Sambodhi, 2018
“शंकराचार्य ने अपने शारीरकभाष्यादि ग्रन्थों में प्रस्तुत समन्वयात्मक सिद्धान्त के आधार पर की है।”
पक्षीकरणम् : एक विश्लेषण
Jaipal Vidyalankar · Sambodhi, 2006
अद्वैत वेदान्त एवं शुद्धाद्वैत में तत्त्वमीमांसा : एक दृष्टि
Namita Kapoor · Sambodhi, 2012
“शंकराचार्य के अद्वैतवाद के अनुसार सजातीय - विजातीय भेद से रहित एवं दिग्देशगुणगतिफलभेद शून्य एवं एकरस ब्रह्म ही परमार्थ रूप से सत्य है ।”
Mahakavi Shri Kalidasa Krit Navaratnamala (Hindi)
Surekha K. Patel · Sambodhi, 2011
नैयायिक ज्ञान का साधन प्रत्यक्ष प्रमाण
Hemlata Srivastava · Sambodhi, 2006
अनेकान्त के प्रतिष्ठापक आचार्य अकलंकदेव
डॉ. अशोककुमार जैन · Jain Vidya, 1999
पार्थिव धर्म
विद्यानिवास मिश्र · Jain Bharati, 2001
तीर्थ और तीर्थकर
डॉ. भोगीलाल जे. साडेसरा · Jain Bharati, 2001