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Mahakavi Shri Kalidasa Krit Navaratnamala (Hindi)

By Surekha K. Patel

Vol. 342011pp. 86–90Hindi

Summary

इस आलेख में महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘नवरत्नमाला’ नामक स्तोत्र की संरचना और काव्यात्मक विशेषताओं का विश्लेषण किया गया है। लेखक बताते हैं कि यह कृति नौ रत्नों के रूप में नवदुर्गा या नवग्रहों की स्तुति करती है और कालिदास के अन्य महाकाव्यों की भाँति प्रकृति‑चित्रण, उपमा और अलंकारों से युक्त है। प्रत्येक श्लोक में कवि किसी रत्न का वर्णन करते हुए उसके रंग, चमक और धार्मिक अर्थों को जोड़ता है। भाषा संस्कृत की परम्परागत सरलता से हटकर अपेक्षाकृत ललित है, जिससे प्रतीकात्मकता बढ़ती है। लेखक कालिदास की शब्दचयन कुशलता की सराहना करते हैं; वे दर्शाते हैं कि कवि ने रत्नों की भौतिक विशेषताओं का चित्रण करने के साथ‑साथ आध्यात्मिक संकेतों को भी पिरोया है—उदाहरणतः पन्ना को करुणा और बुद्धि का प्रतीक, नीलम को भक्ति का और हीरा को शौर्य का प्रतीक माना गया है। आलेख में श्रोतृवृन्द की कल्पना पर पड़ने वाले प्रभाव का भी विश्लेषण है। कालिदास रत्नों के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न गुणों की चर्चा करते हैं और पाठकों को आत्ममूल्यांकन की प्रेरणा देते हैं। लेखक इस बात पर ध्यान दिलाते हैं कि नवरत्नमाला में प्रयुक्त रूपक आज भी संस्कृत साहित्य में अनुपम माने जाते हैं और आधुनिक कवियों ने भी उनसे प्रेरणा ली है। अंततः आलेख इस निष्कर्ष पर पहुँचता है कि ‘नवरत्नमाला’ के अध्ययन से न केवल कालिदास की प्रतिभा की गहराई का पता चलता है बल्कि यह भी समझ में आता है कि कैसे प्राचीन कवि भौतिक और आध्यात्मिक जगत को एकसूत्र में बाँधते थे।

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Conclusion

कुल मिलाकर, ‘नवरत्नमाला’ कालिदास की काव्यसंपदा में एक छोटा परन्तु महत्वपूर्ण रत्न है। इसमें प्रकृति, आध्यात्मिकता और मानवीय गुणों का ऐसा संयोग मिलता है जो पाठक को आज भी सम्मोहित करता है। लेखक का मत है कि इस रचना के माध्यम से कालिदास हमें सिखाते हैं कि बाहरी सौंदर्य और आन्तरिक मूल्य किस प्रकार परस्पर पूरक हो सकते हैं।

Key passages

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  • “काव्यमाला सीरिज के चौथे खण्ड में अंतिम कृति महाकवि कालिदास कृत “नवरत्नमाला कृति दी गई है । यह कृति एक देवी की स्तुतिरूप ग्रंथ है । इसमें सरस्वती और मातड़ी की स्तुति की गई है ।”
  • “इस तरह, नो पद्यों में देवी की स्तुति की गई है | यह देवी गोरी है, श्यामा है। कवि उसको शिवकान्ता भी कहता है ।' तो उसका नाम मातड़ी भी बताया गया है ।”
  • “इस तरह काव्यमाला में प्रसिद्ध हुई 'नवरत्नमाला' या “नवरत्नमालिका' 'भिन्‍न कृति ही है, जो महाकवि कालिदास के नाम पर बताई गई है परन्तु, आन्तर्परीक्षण से यह कृति हम कालिदास की नहीं मान सकते ।”

Works cited in this article

  1. कालिदास, नवरत्नमाला, काव्यमाला खण्ड ४, निर्णय सागर प्रेस, मुम्बई, संस्करण-३, १९३७
  2. सप्तशती, भीताप्रेस गोरखपुर
  3. अमरकोश ६ नामलिंगानुशासन किवा अमरकेश, सम्पादक- जे. बी. सेंडिल, अहमदाबाद, आवृत्ति-१, १९७५
  4. सीताराम चतुर्वेदी, कालिदास ग्रन्थावली, अलीगढ़
  5. काव्यप्रकाश (हिन्दी व्याख्या), श्री मम्मटाचार्य विरचित, सम्पादक : डॉ. नगेन्‍्द्र

Discussed in this article

People

Places

  • मोढेरा

Texts & works

  • नवरत्नमाला
  • ऋग्वेद 7
  • कुमारसंभव
  • अमरकोश
  • धर्मारिण्य पुराण
  • दुर्गसप्तशती

Dynasties, sects & groups

  • कालिकुल
  • मोढ ब्राह्मण वणिकों

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