Articles discussing शंकर
अद्वैत वेदान्त एवं शुद्धाद्वैत में तत्त्वमीमांसा : एक दृष्टि
Namita Kapoor · Sambodhi, 2012
“शंकराचार्य के अद्वैतवाद के अनुसार सजातीय - विजातीय भेद से रहित एवं दिग्देशगुणगतिफलभेद शून्य एवं एकरस ब्रह्म ही परमार्थ रूप से सत्य है ।”
परीक्षा से पहेले
Jain Bharati, 2000
“स्वामीनाथन ने सोचा, मान लो मटर, मणि, राजम और शंकर मुझे छोड़कर दूसरी फार्म-ए में चले गए तो ?”
पार्थिव धर्म
विद्यानिवास मिश्र · Jain Bharati, 2001
यह जो देखते हैं
Jain Bharati, 2001