Articles discussing जिनेन्द्र
मुनिराज ही जिनबिम्ब एवं जिनप्रतिमा
डॉ. (श्रीमती) कुसुम पटोरिया · Jain Vidya, 2013
“सुत्तपाहुड में उन्होंने निश्वेल तथा पाणिपात्र को ही जिनेन्द्र-कथित मोक्षमार्गं बताया है। वस्त्रधारी तीर्थकर भी हो तो मुक्त नहीं होता। नग्नलिंग ही मोक्षमार्गं है, अन्य सब उन्मार्ग हैं।”
आचार्य कुन्दकुन्द की दृष्टि में मुक्ति तत्त्व
डॉ. प्रेमसागर जैन · Jain Vidya, 1990
जसहरचरिउ केर सुहासिय-वयरााइं
पं. भंवरलाल पोल्याका · Jain Vidya, 1985
प्रवचनसार में शुद्धोपयोग की महिमा एवं उस संबंधी गाथाओं का व्याकरणिक विश्लेषण
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 1990
अमितगति श्रावकाचार में श्रावक की जीवनचर्या
डॉ. રપેશચર जैन, ग्राचायं अमितगति · Jain Vidya, 1993