Articles discussing सर्वार्थसिद्धि
अकलंकदेव की कृति तत्त्वार्थवार्तिक
डॉ. रमेशचन्द जैन · Jain Vidya, 1999
“अकलंकदेव ने सर्वार्थसिद्धि का अनुसरण करने के साथ-साथ उसकी अधिकांश पंक्तियों को अपनी वार्तिक बना लिया है।”
तत्त्वार्थवार्तिक में प्रतिपादित मानवीय मूल्य
तत्त्वार्थराजवार्तिक और कर्मबन्ध के प्रत्यय
जैनधर्म के मर्मज्ञ : श्री वीरसेनाचार्य
श्री वीरसेनाचार्य, श्री कन्हैयालाल · Jain Vidya, 1993
शिवार्यकृत भगवती आराधना में चित्रित “समाहित चित्त” का स्वरूप एवं उपयोग : सल्लेखना के परिप्रेक्ष्य में
डॉ. पी. सी. जैन · Jain Vidya, 2011