Articles discussing यूरोप
आध्यात्मिक अर्थशास्त्र की प्रस्तावना
नन्दकिशोर आचार्य · Jain Bharati, 2001
“नरहरि परीख ने इसीलिए आधुनिक अर्थशास्त्र के विकास को यूरोप द्वारा दुनिया की लूट के ओचित्य को प्रतिपादित करने वाला शास्त्र कहा है : जिस रूप में और जिस पद्धति से आज इस विषय की चर्चा होती है, अर्थात् आज जिसे अर्थशास्त्र कहा जाता है, उसका जन्म और विकास पिछले તીન सौ વર્ષો में हुआ”
विज्ञान का दुरूपयोग क्यों
डॉ. रश्मि मयूर, विनोद सेठ · Jain Bharati, 2000
किसे कहें नीति
Jain Bharati, 2000
संयम की बात बजरिए भूकंप
Jain Bharati, 2001