Articles discussing मूलसंघ
संस्थान में महाकवि पुष्पदंत के ग्रन्थों की पाण्डुलिपियां
Jain Vidya, 1985
मूलसंघाग्रणी मुनीदवर कुन्दकुन्दाचार्य
डॉ. ज्योतिप्रसाद जैन · Jain Vidya, 1990
आचार्य पूज्यपाद
आचार्य पूज्यपाद, पं. नरेन्द्रकुमार भिसीकर शास्त्री · Jain Vidya, 1991
सिद्धान्त-शास्त्र-मर्मज्ञ नेमीचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती
आचार्य राजकुमार जैन, नेमीचन्द्र सिद्धान्तचक्रवर्ती, दिगम्बराचार्य नेमीचनद्र सिद्धान्तचक्रवर्ती, अजितसेनाचार्य, आचार्य अभयनन्दी, वीरनन्दी, इन््रनन्दी · Jain Vidya, 1997
सम्पादकीय
डॉ. कमलचन्द सोगाणी · Jain Vidya, 2013
अष्टपाहुड : एक विहंगावलोकन
डॉ. हुकमचन्द भारिल्ल · Jain Vidya, 2013
“पाँच सौ तीन गाथाओं में निबद्ध एवं आठ पाहुडों में विभक्त यह अष्टपाहुड ग्रंथ मूलसंघ के पट्टाचार्य कठोर प्रशासक आचार्य कुन्दकुन्द की एक ऐसी अमर कृति है जो दो हजार वर्षों से लगातार शिथिलाचार के विरुद्ध सशक्त आवाज उठाती चली आ रही है।”